Tuesday, June 25, 2019

अर्दोआन के लिए इस्तांबुल की हार इसलिए है बड़ा झटका

इस्तांबुल शहर में दोबारा हुए मेयर के चुनावों में तुर्की के राष्ट्रपति रैचप तैय्यप अर्दोआन की पार्टी एकेपी को तगड़ा झटका लगा है.
वोटों की गिनती लगभग पूरी हो चुकी है और मुख्य विपक्षी पार्टी के उम्मीदवार एक्रेम इमामोग्लू 7,75,000 वोटों से आगे हैं जबकि दो महीने पहले हुए चुनावों में वो महज 13,000 वोटों से आगे थे.
एकेपी ने मार्च में हुए चुनावों में अनियमितता की शिकायत की थी, जिसके बाद इस चुनाव को रद्द कर दिया गया था.
एकेपी का इस्तांबुल में पिछले 25 साल से शासन था. इसके उम्मीदवार पूर्व प्रधानमंत्री बिनाली यिल्दीरिम ने अपनी हार मान ली है.
ट्विटर पर राष्ट्रपति रैचप तैयप अर्दोआन ने लिखा है, "एक्रेम इमामोग्लू को मैं बधाई देता हूं, जिन्होंने चुनाव में जीत हासिल की है."
इससे पहले अर्दोआन ने कहा था कि "जो इस्तांबुल जीतेगा वही तुर्की जीतेगा". अर्दोआन 2003 से ही देश पर शासन कर रहे हैं. पहले प्रधानमंत्री के तौर पर अब राष्ट्रपति के रूप में.
इतने लंबे समय से देश पर शासन करने वाले अर्दोआन आधुनिक तुर्की गणराज्य की नींव रखने वाले मुस्तफ़ा कमाल पाशा यानी अतातुर्क के बाद सबसे ताक़तवर नेता हैं. लेकिन अब उन्हें चुनौती मिलने लगी है.
रिपब्लिकन पपुल्स पार्टी (सीएचपी) के एक्रेम इमामोग्लू ने जीत के बाद दिए अपने भाषण में कहा कि "ये शहर और देश दोनों के लिए एक नई शुरुआत है."
उन्होंने अर्दोआन के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई, "राष्ट्रपति महोदय, मैं आपके साथ मिलकर शांतिपूर्ण माहौल में काम करना चाहता हूं."इन चुनावों में इमामोग्लू को 54% जबकि यिल्दीरिम को 45% वोट मिले.
वर्तमान में 49 साल के इमामोग्लू इस्तांबुल के ही एक ज़िले के मेयर हैं लेकिन मार्च में मेयर के पद के लिए हुए चुनाव से पहले उन्हें बहुत कम लोग जानते थे.
यिल्दीरिम, अर्दोआन की पार्टी एकेपी के संस्थापक सदस्यों में रहे हैं और 2016 से 2018 तक प्रधानमंत्री रहे लेकिन उसके बाद तुर्की में राष्ट्रपति प्रणाली लागू हो गई और प्रधानमंत्री पद समाप्त हो गया.
इसके बाद बीती फ़रवरी में नई संसद में उन्हें स्पीकर चुना गया. वो परिवहन और संचार मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी भी निभा चुके हैं.
असल में मार्च में इमामोग्लू की 13,000 वोटों से जीत इतनी बड़ी जीत नहीं थी कि यिल्दीरिम अपनी हार स्वीकार करते.
सत्तारूढ़ पार्टी ने आरोप लगाया गया कि वोटों में धांधली हुई है और अधिकांश बैलट बॉक्स पर्यवेक्षकों को आधिकारिक मंजूरी नहीं दी गई थी.
इस आधार पर फिर से मतदान का फ़ैसला लिया गया. हालांकि आलोचकों का आरोप है कि दोबारा चुनाव का फ़ैसला राष्ट्रपति अर्दोआन के दबाव में लिया गया.
यह तुर्की का सबसे बड़ा शहर है, जिसकी आबादी डेढ़ करोड़ है जबकि पूरे देश की आबादी 8 करोड़ है. इस्तांबुल देश की आर्थिक रीढ़ भी है.
ये अर्दोआन के दिल के क़रीब भी है क्योंकि 25 साल पहले जब एकेपी सत्ता में आई तो अर्दोआन ने यहीं से मेयर का चुनाव लड़कर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी.
वो यहां से 1994 से 1998 के बीच मेयर रहे. तुर्की के कुल जीडीपी का एक तिहाई इस्तांबुल से आता है. इसके महानगरीय निकाय का बजट लगभग चार अरब डॉलर है और यहां जीतने का मतलब है शहर के कई महत्वपूर्ण फ़ैसलों में सीधी भागीदारी.
इस चुनाव में इमामोग्लू ने महानगरीय निकाय में व्यापक भ्रष्टाचार और शहरी ग़रीबी को मुद्दा बनाया था.
इस्तांबुल की जीत के साथ ही अब विपक्ष का इज़्मीर और अंकारा में भी क़ब्ज़ा है.
तुर्की में बीबीसी के संवाददाता मार्क लोवेन के अनुसार, हाल के सालों में तुर्की के सबसे ताक़तवर नेता को उसके करियर का ये सबसे तगड़ा झटका मिला है.
नतीजे दिखाते हैं कि दोबारा चुनाव कराने के लिए उन्होंने अपनी ताक़त का इस्तेमाल किया जिससे लोगों की नाराज़गी बढ़ी.
इस हार का एकेपी पर असर पड़ेगा और हो सकता है उसमें फूट पड़ जाए और इस बात को हवा मिले कि अर्दोआन के बाद बागडोर किसके हाथ में जाएगी.
हालांकि उनके पास ये कहने का कारण है कि आने वाले कुछ सालों तक वो सत्ता में बने रहेंगे, क्योंकि 2023 से पहले देश में चुनाव नहीं होने जा रहा है.
कुछ लोगों का ये भी कहना है कि आम चुनाव समय से पहले भी हो सकते हैं. हालिया नतीजों से कुछ लोगों को लगता है कि ये भविष्य के नतीजों का संकेत है.

Monday, June 10, 2019

युवराज सिंह: बल्ले की 'दहाड़' से संन्यास के 'आंसुओं' तक

वराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा की है. 2007 टी-20 वर्ल्ड कप और 2011 क्रिकेट वर्ल्ड कप में जीत के हीरो रहे युवराज सिंह ने मुंबई के साउथ होटल में एक प्रेस कॉन्फ्रेस में अपने संन्यास का ऐलान किया.
37 वर्षीय युवराज सिंह ने भारत के लिए अपना आखिरी वनडे मैच 30 जून 2017 को वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ खेला था.
युवी ने अपना आखिरी टी-20 मैच 1 फ़रवरी 2017 को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेला. जबकि आखिरी टेस्ट मैच दिसंबर 2012 में इंग्लैंड के ही ख़िलाफ़ खेला था.
बीते दो सालों में युवराज सिंह ने भारत के लिए किसी भी फॉर्मेट में क्रिकेट नहीं खेला है.
अपने संन्यास की घोषणा करते हुए युवराज ने क्रिकेट के मैदान से जुड़ी अपनी यादों को ताज़ा किया.
क्रिकेट के मैदान में सबसे अनमोल तीन मैचों के बारे में युवराज में बताया.
युवराज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी तीन सबसे बेहतरीन पारियों में, 2011 में विश्व कप जीतना, 2007 टी20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एक ओवर में लगाए गये छह छक्के और 2004 में लाहौर में बनाया अपना पहला टेस्ट शतक को बताया.

'कैंसर होना आसमान से ज़मीन पर गिरने जैसा'

संन्यास का ऐलान करते हुए भावुक युवराज ने कहा, "मैं बचपन से ही अपने पिता के नक्शेकदम पर चला और देश के लिए खेलने के उनके सपने का पीछा किया. मेरे फैन्स ने हमेशा मेरा समर्थन किया. मेरे लिए 2011 वर्ल्ड कप जीतना, मैन ऑफ़ द सिरीज़ मिलना सपने की तरह था. इसके बाद मुझे कैंसर हो गया. यह आसमान से ज़मीन पर आने जैसा था. उस वक्त मेरा परिवार, मेरे फैन्स मेरे साथ थे."
उन्होंने कहा, "एक क्रिकेटर के तौर पर सफ़र शुरू करते वक्त मैंने सोचा नहीं था कि कभी भारत के लिए खेलूंगा. लाहौर में 2004 में मैने पहला शतक लगाया था. टी-20 वर्ल्ड में 6 गेंदों में 6 छक्के लगाना भी यादगार था."
इस दौरान युवराज ने 2014 के टी20 वर्ल्ड कप फ़ाइनल में श्रीलंका के ख़िलाफ़ 21 गेंद में 11 रन बनाने को अपना सबसे ख़राब प्रदर्शन बताया.
उन्होंने कहा, "2014 में टी-20 फ़ाइनल मेरे जीवन का सबसे ख़राब मैच था. तब मैंने सोच लिया था कि मेरा क्रिकेट करियर ख़त्म हो गया है. तब मैं थोड़ा रुका और सोचा कि क्रिकेट खेलना शुरू क्यों किया था. फिर मैं वापस घरेलू क्रिकेट में गया और बहुत मेहनत की. फिर मैंने तीन साल बाद वनडे क्रिकेट में वापसी की क्योंकि मैंने कभी खुद में विश्वास करना नहीं छोड़ा."
2017 में युवराज सिंह ने क्रिकेट के मैदान में तीन साल के बाद वापसी की और अपने करियर की सबसे बड़ी पारी (150 रन) खेली.
युवराज ने कहा, "डेढ़ साल बाद मैंने टी-20 में वापसी की. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ आखिरी ओवर में छक्का लगाया. 3 साल बाद मैंने वनडे में वापसी की. 2017 में कटक में मैंने 150 रन बनाए, जो मेरे करियर का सबसे बड़ा वनडे स्कोर है."
इस दौरान युवराज ने अपने माता-पिता और पत्नी के साथ-साथ क्रिकेट के मैदान से जुड़े कई लोगों को धन्यवाद दिया.
उन्होंने कहा, "मैंने सौरव गांगुली की कप्तानी में खेलना शुरू किया. फिर मैंने राहुल द्रविड़, जवगल श्रीनाथ जैसे क्रिकेटर्स के साथ खेला. आशीष नेहरा, भज्जी जैसे दोस्त मिले."
उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा खुद पर भरोसा रखा. यह मायने नहीं रखता कि दुनिया क्या कहती है. मैंने सौरव की कप्तानी में करियर शुरू किया था. सचिन, राहुल, अनिल, श्रीनाथ जैसे लीजेंड के साथ खेला. जहीर, वीरू, गौतम, भज्जी जैसे मैच विनर्स के साथ खेला."
"महेंद्र सिंह धोनी जैसे कप्तान और गैरी कर्स्टन जैसे सबसे नायाब कोच के साथ मुझे खेलने का मौका मिला."
संन्यास के फैसले को लेकर पूछे गए सवाल पर युवराज ने कहा, "सफलता भी नहीं मिल रही थी और मौके भी नहीं मिल रहे थे. 2000 में करियर शुरू हुआ था और 19 साल हो गए थे. उलझन थी कि करियर कैसे ख़त्म करना है. सोचा कि पिछला टी-20 जो जीते हैं, उसके साथ ख़त्म करता तो अच्छा होता, लेकिन सब कुछ सोचा हुआ नहीं होता. जीवन में एक वक्त आता है कि वह तय कर लेता है कि अब जाना है."
उन्होंने कहा, "मेरे करियर का सबसे बड़ा लम्हा 2011 वर्ल्ड कप जीतना था. जब मैंने पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 84 रन बनाए थे, तब वह करियर का बड़ा मोड़ था. इसके बाद कई मैच में फेल हुआ, लेकिन बार-बार मौके मिले. मैंने कभी 10 हज़ार रन के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन वर्ल्ड कप जीतना ख़ास था. मैन ऑफ़ द सिरीज़ रहना, 10 हज़ार रन बनाना, इससे ज़्यादा ख़ास वर्ल्ड कप जीतना था. यह केवल मेरा नहीं, बल्कि पूरी टीम का सपना था."
वनडे क्रिकेट में युवराज सिंह ने 304 मैचों में 36.56 की औसत से 14 शतक और 52 अर्धशतकों समेत 8701 रन बनाए और 111 विकेट चटकाये.
टी20 क्रिकेट में युवराज ने भारत के लिए 58 मैचों में आठ अर्धशतकों समेत 1177 रन बनाए. इस फॉर्मेट में युवी 136.38 की स्ट्राइक रेट से खेले.
युवराज को अपने करियर में केवल 40 टेस्ट खेलने का मौका मिला और इस दौरान उन्होंने 33.93 की औसत से 1900 रन बनाये.

Wednesday, April 24, 2019

لماذا لن ينهي اتفاق تجاري التنافس بين الصين والولايات المتحدة

من المستبعد أن ينهي أي اتفاق تجاري بين الصين والولايات المتحدة - إذا أبرم فعلا - التنافس بين هذين العملاقين الاقتصاديين.
وكان البلدان قد خاضا في العام الماضي حربا تجارية أدت إلى الإضرار بالاقتصاد العالمي.
ولكن كثيرين يعتقدون بأن الخلافات بين البلدين تتجاوز النطاق التجاري، بل تمثل صراعا على الهيمنة بين نظرتين مختلفتين للعالم.
فإذا توصل الطرفان إلى اتفاق تجاري أم لم يتوصلا إليه، من المرجح أن يتفاقم الصراع بين الطرفين ويصبح أكثر تعقيدا واستعصاء عن الحل.
يقول مايكل هيرسون، مدير الشأن الآسيوي في شركة "أوراسيا غروب" الاستشارية، "ولجنا واقعا جديدا تفاقم فيه التنافس الجيوسياسي بين الصين والولايات المتحدة وأصبح أكثر جلاء".
ويمضي للقول "قد يخفف اتفاق تجاري جانبا واحدا من الصراع بين الصين والولايات المتحدة، ولكن لفترة محدودة فقط وبتأثير محدود".
يقول محللون إن المرحلة القادمة من التنافس بين الصين والولايات المتحدة ستخاض في قطاع التكنولوجيا الحيوي، إذ سيحاول الطرفان تثبيت موقفهما على أنهما القوة الرائدة في هذا المجال.
وكانت القضايا المتعلقة بنقل التكنولوجيا أخذت حيزا كبيرا في المفاوضات التجارية التي جرت بين أكبر اقتصادين في العالم في الأشهر الأخيرة.
يقول ستيفن أولسون، الباحث لدى مؤسسة هينريش الاستشارية التجارية العالمية، "تقر كل الدول - وهي محقة في ذلك - بأن ازدهارها وثرائها وأمنها الاقتصادي وأمنها العسكري ستكون كلها مرتبطة باحتفاظها على الغلبة التكنولوجية".
يقول عديدون إن المعركة التكنولوجية بين الصين والولايات المتحدة قد بدأت فعلا، وأن عملاق التكنولوجيا الصينية - شركة هواوي - تقع في قلب هذه المعركة.
تتعرض هواوي للكثير من التمحيص الدولي في الآونة الأخيرة، إذ اثارت الولايات المتحدة وغيرها من الدول الغربية مخاوف أمنية حول منتجاتها.
فقد منع الأمريكيون وكالاتهم الاتحادية من استخدام منتجات هواوي، وحضوا حلفائهم على الحذو حذوهم.
ومنعت استراليا ونيوزيلندا استخدام معدات هواوي في تأسيس شبكات الجيل الخامس للاتصالات المحمولة لديهما.
ولكن هواوي تصر على أنها مستقلة تماما عن الحكومة الصينية. وقال مؤسسها رين رينغفي لبي بي سي في شباط / فبراير الماضي إن شركته لن تتورط أبدا في نشاطات تجسسية.
ووصل النزاع ذروته في كانون الأول / ديسمبر الماضي، عندما ألقي القبض في كندا على ابنة رين وعندما رفعت هواوي دعوى قضائية ضد الحكومة الأمريكية.
وشنت هواوي حملة علاقات عامة في الولايات المتحدة، إذ نشرت اعلانا في صحيفة وول ستريت جورنال قالت فيه إن على الأمريكيين "عدم تصديق كل ما يسمعون".
يقول هيرسون إن "عبارة الحرب الباردة تستخدم أكثر مما ينبغي فيما يتعلق بالتوتر بين الصين والولايات المتحدة، ولكنها عبارة دقيقة لوصف التنافس التكنولوجي بين الجانبين".
ويضيف أن الخلاف حول شركو هواوي "يعد تعبيرا عن هذا التنافس الجيوسياسي المتصاعد".
ويقول، "إن حل هذا التنافس أكثر تعقيدا من حل الخلافات التجارية البحتة".
ما لبث قلق الأمريكيين يزداد إزاء الصين في السنوات الأخيرة، جنبا إلى جنب مع تصاعد نفوذ الصين حول العالم.
وساهمت مبادرة الحزام والطريق الصينية ومبادرة "صنع في الصين 2025"، علاوة على نمو نفوذ شركات صينية مثل هواوي وعلي بابا، في تعزيز هذا القلق.
ولخص نائب الرئيس الأمريكي مايك بنس مشاعر ادارته في خطاب ألقاه في تشرين الأول / أكتوبر الماضي قال فيه إن الصين اختارت طريق "العدوان الاقتصادي" عوضا عن "الشراكة".
وكانت الآمال الغربية بأن الصين ستعتنق النموذج الغربي قد خابت واستبدلت باعتراف بأن الاقتصاد الصيني تمكن من الازدهار جنبا إلى جنب مع النظام المدار من قبل الحكومة وليس العكس.
يقول أندرو غيلهولم، مدير شعبة تحليل الصين لدى معهد "كونترول ريسكس" الاستشاري، "أصبحت الصين أكثر وضوحا بكثير فيما يتعلق بطموحاتها في السنوات الأخيرة".
"ولذا لم يعد أحد يتوقع أن تتبع الصين النموذج الليبرالي الديمقراطي الغربي أو أن تنحو نحو اقتصاد السوق كما كان كثيرون يأملون قبل بضعة سنوات".
يعتقد بعض المحللين أن المواجهة بين الجانبين كانت حتمية.
فنظاماهما السياسيان المختلفان جعلهما شريكان لا يمكن التوافق معهما في النظام الاقتصادي العالمي.
يقول أولسن، "ما نراه الآن هو احتكاك بين اقتصاديات السوق الحرة ومبادئ واشنطن واقتصاد جبار متطور تكنولوجيا ومدار مركزيا ويدير اللعبة بشروط مختلفة تماما".
بينما يزداد سباق التكنولوجيا سرعة، يتوقع محللون أن تواصل الولايات المتحدة تطبيق اجراءات لا علاقة لها بالتعريفات التجارية لمواجهة الصين.
ويقول هؤلاء إن تقييد الاستثمارات الصينية في الولايات المتحدة وتحديد قدرة الشركات الأمريكية على تصدير التقنيات إلى الصين ومواصلة الضغط على الشركات الصينية كلها أساليب قد تؤتي أكلها.
ويقول هيرسون، "الاجراءات الخالية من التعرفات لا تسترع انتباه الأسواق، ربما لأن تأثيرها صعب التقدير، ولكن يمكن أن يكون لها تأثير بعيد المدى".
قد يكون من شأن قانون أصدرته الولايات المتحدة في العام الماضي تسهيل هذه العملية.
فقد عزز هذا القانون سلطات الحكومة الأمريكية لإعادة النظر - ومنع - الصفقات التجارية المتعلقة بالشركات الأجنبية عن طريق توسيع نماذج الصفقات التي يمكن للجنة الاستثمارات الأمريكية مراجعتها.
يذكر أن مهمة هذه اللجنة تدقيق الاستثمارات الأجنبية للتحقق من احتمال تشكيلها تهديد للأمن الوطني الأمريكي.
وكانت صفقة كبيرة تتعلق ببيع ببيع شركة مونيغرام الأمريكية لتحويل الأموال إلى شركة أنت فينانشيال التابعة لشركة علي بابا الصينية قد انهارت بعد أن أخفقت الشركتان في الحصول على موافقة لجنة تدقيق الاستثمارات الأجنبية - وذلك قبل صدور القانون الأخير.

Monday, February 18, 2019

الحصبة: هل فكرت يوماً في عدم تطعيم أطفالك؟

أُعلنت حالة الطوارئ في عدد من الولايات الأمريكية، والفلبين، ومدغشقر الشهر الماضي بعد تفشي مرض الحصبة. وقال المسؤولون إن أكثر المصابين من الأطفال الذين لم يُلقحوا ضد المرض، الأمر الذي أعاد الجدل بين المؤسسات الصحية من جهة، والحملات الرافضة للتطعيمات من جهة أخرى، حول جدوى اللقاحات والأخطار المرتبطة بها.
لكن المناهضين للقاحات يرون أن استخدام "تفشي المرض" للدلالة على أهمية التطعيم فيه مغالطة. وبحسب لاري كوك، مؤسس حملة "أوقفوا التطعيم الإجباري" في الولايات المتحدة، فإن الأمراض المعدية لها دورة في المجتمعات، ومن الطبيعي أن تظهر بشكل جماعي من وقت لآخر "وحينها يكتسب الأطفال مناعة من أمهاتهم عن طريق الرضاعة الطبيعية وغيرها من العوامل. وينتهي الأمر باكتساب مناعة جماعية طبيعية."
وقال كوك، في حوار مع بي بي سي، إن رفض التطعيم "ليس موقفا بقدر ما هو أسلوب حياة، تسعى من خلاله الأسر إلى إكساب أطفالهم عناصر طبيعية تمكن أجسامهم من مواجهة المرض". والهدف ليس منع الأطفال من اكتساب العدوى، وإنما التأكد من أن أجسامهم قوية بشكلٍ كافٍ (عن طريق الظروف الصحية الملائمة والتغذية السليمة) لتحمل الأعراض واكتساب مناعة طبيعية تحمي أجسامهم ربما إلى الأبد".
وفي مطلع عام 2019، أدرجت منظمة الصحة العالمية رفض التطعيم ضمن أكثر عشرة أخطار تهدد الصحة العالمية، بسبب الزخم الذي اكتسبته الحملات المناهضة له، والإحصائيات التي كشفت عودة أمراض وبائية كانت قد أوشكت على الاختفاء.
لكن ثمة رأي آخر يرى أن الأمر أكثر تعقيدا من تأثير الحملات المناهضة للقاحات. وبحسب روبن ناندي، رئيس برامج التحصين في منظمة الأمم المتحدة للطفولة (يونيسيف)، فإن عودة بعض الأمراض للانتشار ترتبط بعدة عوامل، ليس من بينها بالضرورة تأثير الحملات الرافضة للتطعيم.
ودعوات رفض التطعيم والطب البديل ليست ظاهرة حديثة، ودائما ما انتشرت حتى في أوج نجاح الحملات الطبية. لكن ما يجب الالتفات إليه حقا هو العزوف غير الطوعي عن التطعيم، سواء لتعذر توفير الخدمات الطبية، أو غياب التوعية والمعلومات الكافية، أو ضعف التواصل مع المجتمعات المهددة.
وأرجع ناندي سبب تفشي الحصبة مؤخرا في مدغشقر، على سبيل المثال، إلى غياب اللقاحات والخدمات الطبية المناسبة. "وفي بعض المناطق (في مدغشقر وغيرها)، تسير الأمهات لفترات قد تبلغ ثلاث ساعات للوصول إلى عيادات التطعيم. وإذا لم تتوفر لهن الخدمة، قد لا يعدن مجددا، أو قد يتجاوزن عن بعض التطعيمات".
وتتعدد أسباب الرفض الطوعي للتطعيم ضد الأمراض التي يمكن القضاء عليها باللقاحات. فبجانب الاعتقاد بخطورتها أو عدم جدواها، ترفض بعض المجتمعات آخذ اللقاح لاعتبارات دينية. كما تروج الحكومات في بعض البلدان أن التطعيم مؤامرة غربية وفخ يجب تجنبه.
وتنتشر المجتمعات الرافضة للقاحات (على اختلاف مرجعيتها) في كل مكان، حتى البلدان التي يكون فيها التطعيم إجباريا. ففي الولايات المتحدة على سبيل المثال، يحصل البعض على "إعفاء لأسباب دينية" من التطعيم، الأمر الذي يساعد على تفشي المرض في بعض المناطق من وقت لآخر.
ويقول ناندي لـ بي بي سي، إن الفيروسات دائما ما تبحث عن الطفل المعرض للإصابة، "وتفشي الأمراض بهذا الشكل من وقت لآخر يُعتبر إنذارا لنا بضرورة تطوير سياسات التحصين".
وثمة طريقتان لتلقي لقاح الحصبة، الأولى عن طريق الحقن بفيروس نشط للحصبة وحدها بحيث يكتسب الجسم مناعة. والثانية عن طريق الحقن بتطعيم ثلاثي ضد الحصبة، والحصبة الألمانية، والنُكاف (ويُعرف اختصارا بـ  ). وتعتبر الجهات الطبية أن هذه الطريقة محاكاة طبيعية للمرض، تتم تحت إشراف طبي لاحتواء الأعراض، وتنتهي بتكوين الجسم مناعة طبيعية تجنبه الإصابة بالمرض.
لكن كوك شدد على أن اللقاحات ليست وسيلة لبناء المناعة وتقويتها كما يُروَج لها، وإنما "مواد شديدة السمية" تعمل على تحفيز الجهاز المناعي بشكل مفتعل ليزيد من إنتاج الأجسام المضادة. "وبدلا من تقوية الجهاز المناعي نفسه بشكل طبيعي، يعتمد نجاح اللقاح على زيادة أعداد الأجسام المضادة التي يفرزها الجسم. لذلك، تحتاج معظم اللقاحات لجرعة تحفيزية ثانية".
وأضاف أنه مع الوقت، لن يستطيع جسم الطفل تطوير رد فعل مناعي متكامل لأي عدوى (لاعتماد الجسم على الأجسام المضادة التي تحفزها اللقاحات)، ما يجعله أكثر عرضة للأمراض.
وفي المقابل، أكد ناندي أن هذه النظريات تم تفنيدها وإثبات جدوى وسلامة اللقاحات علميا، كونها صورة مصغرة من المرض. وتكمن المشكلة هنا في غياب العرض المبسط للمعلومات "فعدم شرح الأعراض الجانبية الطبيعية لتطعيم ما، يدفع الأفراد لرفض فكرة التطعيم ككل والاعتقاد بعدم جدواها".
وأضاف أن "ما يُعرف بالطرق الطبيعية" لاكتساب المناعة وعلاج الأمراض بعيدا عن اللقاحات والأدوية تعتبر "مغامرة بالغة الخطورة"، يتعرض الطفل فيها لمخاطر لا يمكن احتواؤها أو تغييرها.

Tuesday, January 29, 2019

الصين تنجح في إنبات بذور القطن والبطاطا في الجانب المعتم من القمر

قال مسؤولو برنامج الفضاء الصيني إن بذور قطن حملها مسبار تشانغ إي 4 الصيني (واسمه يرمز إلى آلهة القمر عند الصينيين) إلى الجانب المعتم (البعيد) من القمر قد نبتت في التراب القمري، وذلك للمرة الأولى في التاريخ. وأضاف المسؤولون أن هذا الإنجاز قد يساعد في تأسيس أول مستوطنة بشرية في القمر.
وكانت صورة نشرتها يوم الثلاثاء الإدارة الصينية الوطنية للفضاء أظهرت نبتات القطن وغيرها من النباتات وهي تنمو على سطح القمر.
يذكر أن مسبار تشانغ 4 كان يحمل عند هبوطه على الجانب المعتم من القمر في الثالث من الشهر الحالي كميات من مواد البحوث العلمية منها حاوية أطلق عليها "الدائرة البيئية المصغرة لسطح القمر".
وأعلن الاستاذ ليو هانلونغ، المسؤول عن التجربة، يوم الثلاثاء أن بذور القطن كانت أول البذور التي تنبت، ولكن فريقه لايمكنه تحديد موعد حدوث ذلك بشكل دقيق.
وقال ليو إنه بالإضافة إلى القطن، فإن بذور البطاطا واللفت تنمو هي الأخرى بشكل جيدمن جانبه، قال الأستاذ شي غينغشين، كبير مصممي المشروع، إن 6 أحياء اختيرت لإرسالها إلى القمر، هي القطن والبطاطا واللفت والخميرة وذباب الفاكهة والجرجير.
وقال: "أخذنا بعين الاعتبار إمكانية العيش في الفضاء في المستقبل، وتعلم كيفية نمو هذه الأحياء في بيئة تتميز بضعف الجاذبية سيسمح لنا بوضع حجر الأساس لتشييد قواعد فضائية في المستقبل".
وأضاف أن الحاوية التي توجد فيها البذور مزودة بنظام سيطرة يضمن بقاء درجة الحرارة داخله عند حوالي 25 درجة مئوية.
وقال ليو من جانبه إن البطاطا قد تشكل مصدر الغذاء الرئيسي لمستكشفي الفضاء مستقبلا، بينما يمكن استخدام القطن للملابس. أما اللفت فيمكن أن يكون مصدرا للزيت.
وكانت الإدارة الصينية الوطنية للفضاء قالت يوم الاثنين إن الصين تنوي إنشاء قاعدة علمية للبحوث على سطح القمر مستقبلا، مستغلة في ذلك تقنية الطباعة ثلاثية الأبعاد.
اتهمت وزارة العدل الأمريكية شركة تكنولوجيا الاتصالات الصينية العملاقة، هواوي، بالاحتيال وسرقة أسرار تجارية والتآمر.
وتضم لائحة الاتهام 10 تهم بينها سرقة أسرار تجارية من شركة اتصالات أمريكية "تي موبابيل" والاحتيال.
وأضافت أن هواوي قامت حينها بعرقلة العدالة عندما هددت شركة "تي موبايل" بمقاضاة الشركة الصينية.
وألقي القبض على منغ وانزو ، المديرة المالية لشركة هواوي في كندا في الأول من كانون الأول /ديسمبر بناء على طلب من السلطات الأمريكية، إلا أنه أفرج عنها بكفالة لاحقاَ.
وتواجه وانزو اتهامات بالتزوير مرتبطة بانتهاكات مزعومة للعقوبات المفروضة على إيرانوقد أثرت هذه القضية سلباً على العلاقات الأمريكية الصينية والكندية.
وتنفي منغ وشركة هواوي الاتهامات الموجهة ضدهما.
وورد اسم منغ وانزو ، ابنة مؤسس الشركة العملاقة في لائحة الاتهامات التي تضم الاحتيال المصرفي وغيرها من الاتهامات الأخرى ذات الصلة بالانتهاكات المزعومة للعقوبات الأمريكية المفروضة على إيران.
بدأت الشركة في تصنيع أجهزة متعلقة بشبكات الهواتف المحمولة وحققت نموا سريعا في هذا المجال لتتفوق على نظيرتيها نوكيا وإريكسون ما جعلها إحدي الشركات الرائدة عالميا.
ومؤخرا، دخلت هواوي مجال صناعة الهواتف الذكية، واستحوذت على 15 بالمئة من السوق العالمية، لتحتل المرتبة الثانية بعد سامسونغ وتتفوق على أبل.
وكان مؤسس هواوي، رين تشنغ فَي، ضابطا في جيش تحرير الشعب الصيني. وأسس الشركة في عام 1987، ويبلغ عدد العاملين فيها 180 ألف موظف.
وبحسب واشنطن فإن السيطرة على التكنولوجيا التى تتحكم فى شبكات الاتصالات الحيوية تمنح هواوي القدرة على التجسس أو قطع الاتصالات فى حال وقوع أى نزاع مستقبلي خصوصا أن معظم الأجهزة أصبحت مرتبطة بالانترنت، الأمر الذى يجعل الدول التى تستخدم أجهزة هواوي تتابع هذه المخاطر بحرص.
وأشارت الولايات المتحدة أيضا إلى قانون المعلومات الوطني الصيني الذى تم إقراره عام 2017 والذى ينص على أن الهيئات والشركات يجب أن تدعم وتتعاون مع عمل أجهزة الاستخبارات الوطنية .
ونتيجة لذلك، منعت الولايات وأستراليا ونيوزيلندا الشركات المحلية لديها من استخدام هواوي في توفير تكنولوجيا الجيل الخامس لشبكات المحمول .

Monday, January 7, 2019

ائتلاف "النصر" يوضح حقيقة مغادرة العبادي العراق

نفى ائتلاف "النصر" في العراق اليوم، أنباء بشأن مغادرة رئيسه حيدر العبادي بغداد، مؤكدا أن العبادي مستمر بمشروع الائتلاف كمشروع وطني عراقي.
وذكر الائتلاف في بيان: "ما يشاع في وسائل الإعلام عن مغادرة حيدر العبادي العراق أو تركه العاصمة الحبيبة بغداد عار عن الصحة"، مبينا أن "ذلك جزء من ترويج مكشوف لأجندات أجنبية، وجزء من تنافس سياسي رخيص تمارسه جهات غير مسؤولة".
وتابع: "تلك الادعاءات شبيهة بالحملة الكاذبة التي تشيع بإشغاله لعدد من عقارات الدولة. الجميع يعلم أن العبادي وخلال فترة حكمه لم يتجاوز أو يوظف إمكانات الدولة لصالحه، ودخل وخرج من المسؤولية وهو يقيم بمكان واحد".
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وأكد الائتلاف، أن العبادي "لن يتخلى عن مهامه الوطنية التي حمل مسؤوليتها منذ قبوله التكليف. وهو بصدد الاستمرار بمشروع ائتلاف النصر كمشروع وطني عراقي يراد له إتمام مسيرة الانتصارات والمنجزات التي تحققت خلال الأربع سنوات الماضية بهمة وصمود أبناء الشعب وقواه ونخبه الخيرة".
جدير بالذكر أن عددا من وسائل الإعلام ومواقع التواصل الاجتماعي تناقلت أخبارا عن مغادرة العبادي بغداد.
أعلن ممثل المركز الروسي للمصالحة في سوريا إدوارد تيتوف، أن العسكريين الروس سلموا في ريف دمشق 500 طرد غذائي كمساعدات إنسانية للنازحين عن بلدة كفريا في محافظة إدلب السورية.
وقال تيتوف: "وصلنا إلى مخيم حرجلة للاجئين وأحضرنا 500 طرد غذائي معبأة بالأرز والسكر والدقيق، واللحم المعلب والشاي".
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 وأوضح تيتوف، أن المواطنين الذين نزحوا من بلدة كفريا بعد حصار دام 3 سنوات من الجماعات الإرهابية يقيمون حاليا في مخيم حرجلة جنوب محافظة ريف دمشق.
وتعد بلدة حرجلة الواقعة في جنوب محافظة ريف دمشق، من البلدات الصغيرة التي لا يتجاوز عدد سكانها الـ10 آلاف نسمة وتبعد عن دمشق 20 كم، وافتتح في حرجلة حاليا مركز كبير لاستقبال اللاجئين والنازحين.
أعلن لبنان أنه "ليس صاحب القرار" في دعوة سوريا إلى القمة الاقتصادية العربية المرتقبة في يناير الجاري ببيروت، "لكن بإمكانه المبادرة والعمل من أجل حضورها".
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مساع لبنانية لدعوة دمشق إلى قمة بيروت وأنباء عن تأجيلها
وكتب وزير الخارجية اللبناني جبران باسيل على حسابه في "تويتر"، أن لبنان ليس من يدعو، بل يتقيد بقرار الجامعة العربية، لكنه يستطيع أن يبادر ويعمل لعودة سوريا إلى الجامعة العربية.
وقال باسيل في مؤتمر صحفي عقده عقب لقائه البطريرك اللبناني مار بشارة بطرس الراعي: "أعتقد أننا نقوم منذ زمن بكل ما يلزم نتيجة لقناعاتنا ومواقفنا وما حصل في سوريا هو أنه يجب أن تكون في قلب الحضن العربي والجامعة العربية ووضعها خارج الجامعة غير سليم. لبنان لا يوجه الدعوة وإنما يمكنه المبادرة والعمل لكي تكون سوريا في الجامعة العربية".
وتابع: "رأينا كفريق سياسي وكخارجية لبنانية معروف، نحن لم نقطع العلاقة مع سوريا، عندنا سفارة في الشام ولسوريا سفارة في لبنان وهناك علاقة دبلوماسية بين البلدين ووضعنا سليم معها ومع صدور قرار تعليق عضوية سوريا في جامعة الدول العربية لبنان كان من الرافضين للقرار".
ومن المقرر أن تستضيف بيروت يومي 19 و20 من الشهر الجاري، القمة التنموية الاقتصادية التي تعقدها الجامعة العربية.
وكانت الجامعة العربية قد علقت عضوية سوريا في نوفمبر 2011، نتيجة ضغوط مارستها دول عربية حمّلت حكومة الرئيس بشار الأسد المسؤولية عن مقتل المدنيين في سوريا.

Friday, November 16, 2018

تقول الشرطة النيجيرية إن المعلومات المضللة التي تنشر

تقول الشرطة النيجيرية إن المعلومات الكاذبة والصور المثيرة التي تنشر في فيسبوك أسهمت في ارتكاب أكثر من 12 جريمة قتل في ولاية الهضبة - وهي منطقة مبتلاة بأعمال عنف أثنية أصلا - في الفترة الأخيرة.

عندما اتصل برنامج "عين إفريقية" بفيسبوك، بادرت الشركة إلى إلغاء حساب رجل مقيم في بريطانيا كان ينشر أخبارا كاذبة يتلقفها الآلاف في نيجيريا.ولكن شركاء فيسبوك في نيجيريا المكلفون بمراقبة دقة ما ينشر في الموقع من معلومات لم يعينوا إلا 4 مراقبين دائمين لفحص ما يرد في الموقع من معلومات وصدقها، وذلك في موقع يستخدمه أكثر من 24 مليون نيجيريي 23 حزيران / يونيو 2018، بدأت سلسلة من الصور المرعبة بالانتشار في فيسبوك.
أظهرت واحدة من هذه الصور طفلا مصابا بجروح أحدثتها سكين كبيرة في رأسه وفكه، بينما أظهر شريط مصور - تمت مشاهدته أكثر من 11 ألف مرة - جمجمة رجل وهي تكسر.
كما تداول المشاركون صورا لمنازل أحرقت عن بكرة أبيها وجثثا مضرجة بالدماء ملقاة في مقابر جماعية وأطفالا قتلوا في أسرتهم.
إدعى مستخدمو فيسبوك الذين نشروا الصورأنها تظهر مجزرة ما زالت جارية في منطقة غاشيش التابعة لولاية الهضبة (بلاتو) النيجيرية، مضيفين أن المسلمين الفولاني يقتلون المسيحيين المنحدرين من أقلية البيروم المحلية.في حقيقة الأمر، كانت مجزرة قد وقعت فعلا في غاشيش نهاية ذلك الأسبوع، ، فقد قتل عدد يتراوح بين 86 و238 من أفراد أقلية البيروم في الفترة بين 22 و24 حزيران / يونيو حسب تقديرات الشرطة وزعماء محليون.
ولكن بعضا من أكثر الصور التي تم تداولها اثارة للغضب والتقزز لم تكن لها أي علاقة بالعنف في غاشيش. فصورة الطفل المذكورة، والتي نشرت بمعية دعاء إلى الله أن "يقضي على كل جيل قتلة هذا الطفل البريء"، كانت قد نشرت في فيسبوك قبل عدة شهور. أما الشريط الذي يظهر الرجل ذا الجمجمة المكسورة فلم يصور في نيجيريا أصلا، بل في عام 2012 في الكونغو برازافيل على مسافة الف ميل تقريبا من المكان الذي زعم أن الحادث وقع فيه.
ولكن الحقيقة لم تكن مهمة، فالصور تلقفها شباب البيروم في مدينة جوس التي تبعد مسافة ساعات عن المنطقة الريفية التي كانت المجزرة تقع فيها.
ألمحت بعض المداخلات التي نشرت في فيسبوك إلى أن المجزرة تقع في جوس نفسها، وأن سكان المدينة مهددون بهجوم وشيك. لم يتوقف إلا قليلون للتحقق من صحة هذه المعلومات أو لاستقصاء مصادر الصور البشعة التي كانت تنتقل من هاتف إلى آخر.
قال أحد قادة شباب بيروم لبي بي سي، "ما أن شاهدنا هذه الصور حتى أردنا أن نشنق أي رجل من الفولاني يقف إلى جوارنا. ومن لا يساوره هذا الشعور وهو يرى أخيه يقتل أمام عينيه؟"
أسهمت الصور في إثارة جو من الرعب والغضب والدعوات للاقتصاص من الفولاني - جو كان على وشك القضاء على زوج وأب يدعى علي الحجي محمد.
كان علي يعمل بائع بطاطا في جوس، وهي مدينة يبلغ عدد سكانها نحو مليون نسمة.
في 24 حزيران / يونيو، توجه علي إلى بلدة تدعى مانغو للقاء بعض من زبائنه. كانت رحلة مألوفة بالنسبة له، إذ سبق له أن قام بها مئات المرات. غادر علي مسكنه بعد صلاة الفجر بقليل، وكان يأمل في أن يعود مبكرا ليتناول طعام العشاء مع زوجتيه: أمة وأمينة وأطفاله الـ 15.
ولكن لدى عودته في سيارة أجرة استقلها مشاركة مع عدد من الركاب، فوجئ علي بأن الطريق مغلق بحاجز من اطارات السيارات المشتعلة. كانت عصابة من البيروم المسلحين بالسكاكين والسيوف تحقق مع السائقين بحثا عن الفولاني المسلمين.
سحل علي عنوة من السيارة التي كان يستقلها بمعية راكب آخر. وعثر على جثته المتفحمة بعد ثلاثة أيام إلى جانب الطريق العام الواصل بين جوس وأبوجا. وكانت الجثة مشوهة إلى درجة أن زوجتيه رفضتا النظر اليها.كان علي واحدا من 11 رجلا سحلوا من سياراتهم وقتلوا في 24 حزيران / يونيو.
أضرمت النار في بعض من هؤلاء، بينما قتل آخرون طعنا بالسكاكين وتقطيعا بالسيوف. واكتشفت جثثهم في الأيام اللاحقة ملقاة في حفر أو خلف المنازل أو على قارعة الطرق. وقد أحرقت جثث الكثيرين بحيث أصبح من العسير التعرف عليها.